ये प्यार ही तो ज़िन्दगी... भाग ५५
भाग ५५वैदेही की खुशी का ठिकाना नहीं था। परिंदों की चहचहाहट से वह भोर में ही जाग गई थी। सुबह की सर्द हवा भी उसे सुहावनी लग रही थी। सूरज भी गुलाल बिखेरते हुए फलक को अपनी आभा से सम्मोहीत कर रहा था। प्रकृ...
पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े