अंतस पट...
शीर्षक : अंतस पट... ||1|| कानन-कानन बिखरें विवश सुमन, माली को तरसे श्यामल सजल नयन! सूर्योदय हो या अस्ताचल की ओर गमन, ममतामई स्पर्श को वंचित वन-उपवन! ||2|| वृक्ष-वल्लरियों का...
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