कुण्डलियाँ छंद
कुण्डलिया छंद!रघुवर का कर जाप तू , देता मन को शक्ति।पुरुषोत्तम प्रभु राम की, जन-जन करते भक्ति।जन-जन करते भक्ति, दर्श पा होते भावुक।कर्म बन्ध को तोड़, जोड़ता नाता नाजुक।सकल सत्कार-मान, मिले जो गुरु के ...
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