GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyअंतिम इच्छा!मेरी भावना:दोहे!मुझे जला मत मानवी , दफ़ना मत प्रिय आज।बाद मौत के खोल दो, अंगदान का राज।।मृत्यु भोज की चाहना, लाती दिल अवसाद।अस्थि कलश मत भेजना, जल जाने के बाद।।काम किसी के आ गई, अंग-अंग आगा...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें