GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyये प्यार ही तो ज़िन्दगी...भाग ७भाग ७वैदेही के तन-मन के घाँव अब भरने लगे थे.. ..पतझड़ के बाद अब खूंट से पेड़ों पर नन्ही-नन्ही कत्थई कोपलें मुस्कुरा रही थी... आँगन की रातरानी महक रही थी.. उसकी सुगंध बीते दिनों की याद ताज़ा कर रही थी...अ...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें