GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyकन्यादान कन्यादानघर आँगन की कली,प्रेम स्नेह से है पली,जायेगी जब ससुराल, दिल थाम लिजिए।।बोल बोले मीठे मीठे,अमृत सा रस घोले,पायेगी लाडो सम्मान,शिक्षा धन दिजिए।।नव यौवना लाडली,तितली सी मनचली,दमकेगी दीपज्योति...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा चंचल जैनThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें