GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyअरुण छंदनमन माँ शारदेअरुण छंदमोद से, उल्लसित, भाव हिय शांति का।मेल से, मन मिले, अंत हो भ्रांति का।।प्रेम के, रंग में, इंद्रधनुषी जिया।पुष्पिता, हो धरा, हरितिमा वादियां।।दंभ का, द्वेष का, ...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा चंचल जैनThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें