GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyरोला छंद छोटी सी हो बात, बतंगड़ नहीं बनाना।कोई झोला छाप, सीख दे, हो न फ़साना।।लोग तमाशा देख, मजा लेते फोकट का।तड़पाये जब भूख, मिले दोना भोजन का।। स्वरचित मौलिक रचना चंचल जैनमुंबई, महा...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा चंचल जैनThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें