नेह अमृत
झर-झर झरता निर्मल जल हैं,सावन बूंदों की मधुरिम सरगम हैं,मन मयूर नाचे हर्षित छम-छम,भर भर अंजुरी में ले लूँ, अमृत जल हैं।।चंचल जैन
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