GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyदो पैरों वाला प्राणीदो पैरों वाला ये प्राणी है जन्मों जन्मों का शातिर | इसने रब का खेल बनाया छल के मंसूबों की खातिर || रब जो यत्र तत्र मिलता था भोले चेहरों पर खिलता था | मीठी वाणी सुथरे मन में अविरल गंगा सा...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा chandra katyalThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें