GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyआवरण!आवरण: सहस्त्र रश्मियों ने खोले, कलियों के घूंघट, महकी फिज़ा, डोला तन-मन! बहकी हवाओं ने उंडेले, बादलों के अमृत घट, भीगी धरा, महका उपवन! पंखुड़ियों ने उतार फेंके, लज्जा के आवरण तोड़ी परंपराएं, झूठ...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें