आवरण!
आवरण: सहस्त्र रश्मियों ने खोले, कलियों के घूंघट, महकी फिज़ा, डोला तन-मन! बहकी हवाओं ने उंडेले, बादलों के अमृत घट, भीगी धरा, महका उपवन! पंखुड़ियों ने उतार फेंके, लज्जा के आवरण तोड़ी परंपराएं, झूठ...
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