स्वयंसिध्दा
स्वयंसिध्दाढल गयी उम्र, कुम्हलाये हम,कदम भी डगमगाने लगे अब।।सबके लिए हंसते- मुस्कुराते,जीते रहे जमाने के लिए।।चलते चलते दूर तक आयेथका तन-मन, पांव थके।।मिली फुरसत, थामी कलम,शब्दों की माला गुंथने लगे।।थ...
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