माया
नमन माँ शारदेकुण्डलिया छंदमाया को जग पूजता, वैभव का गुणगान।रिश्ते फीके से लगे, निर्धन का अपमान।।निर्धन का अपमान, लड़े भाई-भाई से।खींचा-तानी   शोर,  होड़  बेपर्वाई  से।।नेह...
पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े