GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyमायानमन माँ शारदेकुण्डलिया छंदमाया को जग पूजता, वैभव का गुणगान।रिश्ते फीके से लगे, निर्धन का अपमान।।निर्धन का अपमान, लड़े भाई-भाई से।खींचा-तानी शोर, होड़ बेपर्वाई से।।नेह...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा चंचल जैनThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें