ठहराव(जीवन दर्शन)
एहसास एक पल उम्र का सदियां गवाएं बैठा है, जरा ठहरो और देखो यादें छुपाए बैठा है, बचपन जवानी और बुढ़ापा निकल गया हलचल में, न मिला समय रुकने का  सब बीत गया पल-पल में, याद करो अपने बचपन को कैसे खेल...
पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े