GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyठहराव(जीवन दर्शन)एहसास एक पल उम्र का सदियां गवाएं बैठा है, जरा ठहरो और देखो यादें छुपाए बैठा है, बचपन जवानी और बुढ़ापा निकल गया हलचल में, न मिला समय रुकने का सब बीत गया पल-पल में, याद करो अपने बचपन को कैसे खेल...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा Kapil TiwariThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें