अंतरराष्ट्रीय बुजुर्ग दिवस के उपलक्ष्य में...
शीर्षक : भूल-भूलैया! बूढे बापू की बूढ़ी चमड़ी सी, सूखी धरती फटी-फटी! तरस रही छुपाने बरसों से, दिल की परतें कटी-कटी! दूरियाँ हैसियत में जुदा-जुदा, झोपड़ियाँ हैं सटी&...
पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े