अब
खो रही मानवता की पहचान अबइंसानियत पहचाने न इंसान अबसुनना तुम बस बोलना कुछ भी नहीं है सियासत का यही फरमान अबबस चुनावों में तुम्हें पहचानेंगेकर दिया है कुर्सी ने ऐलान अबचैन और राहत के पल मिलते नहीं...
पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े