कुण्डलिया छन्द!
कुण्डलिया छन्द।विषय : पिताहथियारों की होड़ में, मूल्य गए हैं हार।महाशक्तियाँ युद्ध में, करती जमकर वार।।करती जमकर वार, डाल कर घी नफ़रत का।सुलगाती है द्वेष, मोड़ कर रुख़ दरख़्त का।।भाईचारा खत्म, दहक हैं अंगा...
पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े