GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyदूरियाँ दिलों को...दूरियाँ दिलों को अक्सर जोड़ती हैं यारों।सागर में समाने सरिता दौड़ती हैं प्यारों।ब्याहता राणा की चली,राज महल की ऒर।रुण झुण बजे पायलड़ी,गिरधर से बँधी डोर।।दूरियाँ अवचेतन मन को लाँघती हैं यारों।सागर में स...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें