दूरियाँ दिलों को...
दूरियाँ दिलों को अक्सर जोड़ती हैं यारों।सागर में समाने सरिता दौड़ती हैं प्यारों।ब्याहता राणा की चली,राज महल की ऒर।रुण झुण बजे पायलड़ी,गिरधर से बँधी डोर।।दूरियाँ अवचेतन मन को लाँघती हैं यारों।सागर में स...
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