GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyये प्यार ही तो ज़िन्दगी...भाग ८५भाग ८५आजी की बातें जानकी जी के मन में तांडव कर रही थी। 'पोरी चं लग्न कधी करतेस? काखेला कळसा अन गावाला वळसा?' सामान्य परिस्थिति में वज्र का रिश्ता आता तो क्या जानकी जी इतना सोचती? लेकिन अब.. हार्ट ट्रा...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें