बिखरी-बिखरी..
बिखरी-बिखरी सी रंगत शाख के झूलों की,डाल पर मस्ती में खिलखिलाते फूलों की!वो चहचहाहट कहाँ हैं मासूम परिंदों की,भूली-बिसरी सी यादें जश्न के बाशिन्दों की!बादलों के पीछे सूरज की छुपन-छुपाई पर! प्राची ...
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