GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyबिखरी-बिखरी..बिखरी-बिखरी सी रंगत शाख के झूलों की,डाल पर मस्ती में खिलखिलाते फूलों की!वो चहचहाहट कहाँ हैं मासूम परिंदों की,भूली-बिसरी सी यादें जश्न के बाशिन्दों की!बादलों के पीछे सूरज की छुपन-छुपाई पर! प्राची ...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें