GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyतिनका एक तिनका उठा धरातल सेअपनों के हठ आंचल से,मैं हवा के रुख से बढ़ जाऊँगाजल्दी ही मैं उड़ जाऊँगा,आस जगी तो छोड़ दिया,अपनों से मुख को मोड़ दिया,चलने लगा गगन की ओर जहाँ हवा का रुख था जोर,देख-देख वैभव इ...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा Kapil TiwariThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें