GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyफिर नयी पुकार...कैसी है कश्ती और कैसे है किनारेन हम है तुम्हारे, न तुम हो हमारे,चाहत जो की थी वो गुमशुम है कब सेलगता है मोहब्बत की ही न हो तुमसे..देखे जो सपने, संजोके जो अपनेहकीकत में वो तो थे ही न अपने,जो समय ने दिय...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा Kapil TiwariThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें