उत्सव!
लम्हा-लम्हा जिंदगी,हथेलियों में समेट,खिलखिलाया किजिए!बेवजह गिले-शिकवे,रुठने-मनाने में,गंवाया न किजिए!देहरी पे जलते,अदना से दीये को,अनदेखा न किजिए!प्यार के लफ़्ज़ों को,धागे में पिरो कर,फिज़ा महका दिजिए...
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