स्नेह-नेह!
रात के बारा बजे फ़ोन की घंटी घनघना रही थी.. विचारों में डूबी कुसुम झट से उठ कर बैठ गई और अपना फ़ोन टटोलने लगी... फ़ोन सामने पड़ा था पर बावरी उसे यहाँ-वहाँ ढूंढ़ रही थी! प्रणव की आवाज़ से उसके ह्रदय को कुछ ठ...
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