GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyपर्व पर्युषण पर्व पर्युषण में सखा, मिटे हृदय दुर्भावना।कर्मो की हो निर्जरा, मोक्ष-मुक्ति आराधना।जप-तप धार्मिक कार्य हो, धर्म-ध्यान सद्भावना।मानव जीवन सार्थ हो, धारे भाव उपासना।।क्षमा दान की याचना, धर्म-कर्म हो बंद...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा चंचल जैनThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें