पितृ-दिवस पर समर्पित रचना!
कौन कहता है, छोड़ गए हो, अजनबी जहाँ में!बाप्पा! जिन्दा हो आप हमारे मन-मंदिर में! सृष्टि के ज़र्रे-ज़र्रे में !!माँ की नम आँखों में, झलकता अक्स आपका!घर के कोने-कोने से,  प्रतिध्वनित होते शब...
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