22560125601modify सरसी छन्द...सदा आगमन नूतन संवत, लाता है आनन्द।गुड़ी पाड़वा उत्सव करता, जगत चाक़-चौबन्द।।अनुपम स्वरुप सृष्टि का देखो, भाएं जीव अपार।मन में 'मोहन वीणा' बजती, रचती सरसी छन्द।।स्वरचित तथा मौलिक,कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई।LabelDirected by द्वारा कुसुम सुराणाShared30 Mar 2025Start30 Mar 2025End30 Mar 2030 The Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैंटिप्पणी लिखेंYuvit Sonu Jain18-Apr-2025CommentLikeवाह खूब! ❤️🙏❤️🙏❤️🙏❤️Yogesh Jain24-Jun-2025CommentLikeवाह! बहुत सुन्दर सरसी छन्द...© टिप्पणी400 characters remainingजमा करेंरद्द करें