माँ भारती का सौन्दर्य-बोध, श्रृंगार विशेष! अध्यात्म, अन्वेषण, अनुसन्धान, अनिमेष!
मानव उत्थान-कल्याण भावना अशेष!
अनेकता में एकता मातृभूमि का परिवेश!
हिमशिखरों की उतुंग चोटियों से बहे गंगा!जन्मभूमि के आँचल सा लहराएं तिरंगा!
चरण-रज-स्पर्श से पावन हिन्द महासागर!
पूर्वांचल से उदित हो ज्योतिर्मय भास्कर!
रत्नगर्भा जननी, माँ भारती, वीर प्रसूता! श्रीराम, गौतम बुद्ध, महावीर धर्म-प्रणेता!
सर्व-धर्म-समभाव, सर्व-जन-हिताय नेता!
महाराणा प्रताप, शिवाजी रणवीर विजेता!
'सोने की चिड़ियाँ' आक्रांतीयों के कैद में!
सतीत्व रक्षणार्थ 'पद्मिनियाँ' कुदी आग में!
परतंत्रता की बेड़ियों में जननी-जन्मभूमि!
राजे-रजवाड़ों ने रंगमहल-धरा-रज चूमी!
सभ्यता, संस्कृति हैं विश्व थाती अनमोल!
ज्ञान प्रकाश, स्नेह बाती से प्रज्वलित पल!
पहनावा, परम्पराएं, पर्व, पहचान, सरल!
स्वदेश विकसित, विश्वगुरु, विशेष, विरल!