2277522775modify रोला छंद रोला छंदविषय : मौलिक सपने सुन्दर देख, मनुज तू अपने दम पर।लिख तू अपना लेख, कोशिशों के ही बल पर।।चलना है मनु नित्य, सफ़र रखना तू जारी।लक्ष्य भेद का ध्यास, पार्थ का पड़ता भारी।।स्वरचित तथा मौलिक,कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई।LabelDirected by द्वारा कुसुम सुराणाShared19 Nov 2025Start19 Nov 2025End19 Nov 2030 The Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैंटिप्पणी लिखेंरोला छंद © टिप्पणी400 characters remainingजमा करेंरद्द करें