21615526155modify रोज..डार्लिंग! रोज-रोज रोजी को रोज मंगता!दिल-विल छोड़ो, लाल-लाल गुलाब मंगता।यारा! दिलदारा! तेरी बाहों का हार मंगता,होठों की छुअन, नशीला मय का जाम मंगता!स्वरचित तथा मौलिक LabelDirected by द्वारा कुसुम सुराणाShared10 Feb 2025Start10 Feb 2025End10 Feb 2030 The Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैंटिप्पणी लिखेंNeetu Jain25-Jun-2025CommentLikeमनमोहक शब्दों से बयाँ करते सुन्दर ! बधाईरोज..© टिप्पणी400 characters remainingजमा करेंरद्द करें