12482114821modify निश्चल छन्द!सादर समीक्षार्थ निश्चल छंद: सच अडा-खड़ा है कोने में, डर कर आज।झूठा बड़ा-चढ़ा कर बोले, बिगाड़ काज।।सब गुलाम, कर सलाम खोले, कभी न राज।बाहुबली पर गिरती कब है, न्यायिक गाज।स्वरचित मौलिक रचना कुसुम अशोक सुराणा, मुंबई, महाराष्ट्रLabelDirected by द्वारा कुसुम सुराणाShared31 May 2025Start31 May 2025End31 May 2030 The Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैंटिप्पणी लिखेंJain Mikhil14-Aug-2025CommentLikeवाह! सुन्दरChavi Jain Dhabaria03-Jul-2026CommentLikeबहुत बढियाँ निश्चल छन्द!© टिप्पणी400 characters remainingजमा करेंरद्द करें