नैतिक शिक्षा स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा होना चाहिए
नैतिक शिक्षा स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा होना चाहिए

हमें ऐसी शिक्षा चाहिए जिससे चरित्र का निर्माण हो , मन की शांति बढे , बुद्धि का विकास हो, और मनुष्य अपने पैरों पर खड़ा हो — स्वामी विवेकानन्द

शिक्षा तभी पूर्ण होती है जब वह व्यक्ति के सर्वांगीण विकास में मदद करती है, सर्वांगीण विकास की जब हम बात करते है तब मैं कहना चाहूँगा बौद्धिक और शारीरिक विकास के साथ आत्मिक उन्नति जिसे हम नैतिक शिक्षा कह सक सकते हैं ।
नैतिक शिक्षा व्यक्ति की सामाजिक सोच और व्यक्तिगत सोच को प्रभावित करती है और उसे सही और गलत के बीच अंतर करने में मदद करती है। नैतिक शिक्षा आधुनिक समय की एक मूलभूत आवश्यकता है जहां व्यक्ति तेजी से नैतिक मूल्यों का पतन देख रहा है।
नैतिक शिक्षा महत्वपूर्ण है क्यों की इससे व्यक्ति की सोच बदलती है, वह सही और गलत में अंतर करना सिख सकता है । यह शिक्षा हमें विविधता,सहिष्णुता और विविध नैतिक मूल्यों को सिखाती हैं । नैतिक मूल्यों में कई मूल्य आते है जैसे की देश सेवा ,ईमानदारी,सच बोलना,
सही का साथ देना , समाज के प्रति अपना दायित्व समझना और दूसरों के प्रति सम्मान आदि ।
चूंकि युवा अवस्था में छात्र अच्छे या बुरे सभी प्रकार के प्रभावों को आसानी से और अनजाने में आत्मसात कर लेते हैं ।यदि उनके पास उचित मार्गदर्शन एवं सही दिशा नहीं है तो यह भी हो सकता है की वे गलत व्यक्तियों और गलत चीजों कों आत्मसात कर सकते है ।ऐसे में नैतिक शिक्षा इन युवाओं को सही रास्तें पर चलने में मदद कर सकती है । ।
तो यह महत्वपूर्ण है कि हम सब उन्हें ऐसी शिक्षा प्रदान करे जो उन्हें अच्छे नैतिक सिद्धांतों को प्राप्त करने और विकसित करने में मदद करे। उचित दृष्टिकोण और मूल्य जो उन्हें अपने वयस्कता में अच्छे और सही विकल्प और जीवन में उचित निर्णय लेने में सक्षम करेंगे। विद्यालय स्तर पर तो यह तो हमें छात्रों से रोज नैतिक शिक्षा के पाठ सिखाने चाहिए ।
प्राथमिक कक्षाओं में जब छात्र पढ़ते हैं तब वे बहुत सी नयी-नयी चीजे सीखते है । सामाजिक परिवेश में किस तरह हमें रहना है और हमरा सर्वांगीन विकास नैतिक शिक्षा के माध्यम से किस तरह हो सकता है, यह वे सीखते हैं।
अगर उदहारण की तौर पर देखा जाए तो भारत को प्राचीन काल में वैश्विक गुरु कहा जाता था। आप ने कभी सोचा है ऐसा क्यूँ कहा जाता था, क्यूँकि भारत में तब शिक्षा के साथ साथ नैतिक मूल्यों को सिखाया जाता था एवं उनका अनुग्रह छात्र करते भी थे ।आदर्शों के बिना और उचित संस्कारों के बिना जीवन को हम जीवन नहीं कह सकते हैं।नैतिक शिक्षा के माध्यम से ही हम छत्रों मानवी संस्कार,उच्च आदर्श और चरित्र से परिपूर्ण समाज बना सकते है ।
इस लिए मेरा यह मानना है की नैतिक शिक्षा को पाठ्यक्रम का हिस्सा होना चाहिए ताकि हम अपना देश उचित आदर्श और मूल्यों से भरा बना सकें।

सुशील जोशी
प्राथमिक शिक्षक


    द्वारा SUSHIL JOSHI
    Shared06 Jul 2025
    Start06 Jul 2025
    End06 Jul 2030
    इस पर लोग क्या कह रहे हैं
    • सही कहा आपने सुशील जी! शिक्षा और वास्तविक जीवन में जब तक तालमेक नहीं होगा, छात्र दुविधा में ही भटकते रहेंगे! अच्छा अनुकरणीय लेख!🙏🙏🙏
    • धन्यवाद महोदया, आप इसे शेयर भी कर सकते है। ताकि इसका महत्व सब को पता चले।
    • बहुत खूब