23502825028modify हौले आई भोर नमन माँ शारदेदोहा छंद मुक्तक प्राची से रवि रश्मियां, आई हौले भोर।चेतन सारा जग हुआ, थामे जीवन डोर।।झूमे कलियां बाग में, महक रही है सृष्टि--मनभावन बरसात में, नाचे छमछम मोर।।चंचल जैनLabelDirected by द्वारा चंचल जैनShared16 May 2025Start16 May 2025End16 May 2030 The Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैंटिप्पणी लिखेंकुसुम सुराणा17-May-2025CommentLikeवाह! बहुत खूब!Vibha Jain09-Jun-2025CommentLikeबहुत सुन्दर रचनाJain Mikhil08-May-2026CommentLikeबहुत सुंदर हौले आई भोर © टिप्पणी400 characters remainingजमा करेंरद्द करें