नफरती दौर
नफरती दौर

नफरती दौर में मोहब्बत की कुछ तो गुंजाइश हो
इंसान के सब्र की न इतनी भी आजमाइश हो

सियासत ने हमें हर वक्त आपस में लड़ाया है
दिखाना जो भी चाहा है वही हमको दिखाया है

कभी मन्दिर कभी मस्जिद, कभी हम नाम पर लड़ते
जो हर इंसा को रोटी दे, नहीं उस काम पर लड़ते

धर्म के नाम पर लड़कर बुरा ही हाल होता है
धर्म चाहे कोई भी हो, खून तो लाल होता है

गर लड़ना इतना जरूरी है, तो शिक्षा, स्वास्थ्य पर लड़ते हैं
कि अच्छा बुरा समझने को ही तो हम दिन रात पढ़ते हैं

कि सत्ता के गलियारों तक कैसे हरक आवाज जायेगी
गर हर सब की आंखों पर धर्म की पट्टी छायेगी

कि हर एक जुल्म के आगे हमें आवाज उठानी है
जो ऐसा न ही कर पाए तो उसका खून पानी है

तो हम सब साथ मिलकर, जोर से एक आवाज उठाएंगे
जो अब तक था, वो अब तक था,
कि हम सब साथ मिलकर अब नया भारत बनाएंगे।


    द्वारा Yogesh Awasthi
    Shared22 Jan 2025
    Start22 Jan 2025
    End22 Jan 2030
    इस पर लोग क्या कह रहे हैं