सवेरा
सवेरा

धूप ने खिड़की से झाँका,
नई सुबह ने गीत सुनाया।
हर किरण ने बात कही,
जीवन को फिर से सजाया।

तारों ने जो स्वप्न बुने थे,
अब उजाले ने खोल दिए।
मन के कोने, जो थे सूने,
प्रेम की बारिश से बोल दिए।

कोयल की मीठी तान में,
छुपा कोई संदेश नया।
प्रकृति ने फिर पन्ना खोला,
जैसे लिखा हो ख़त सजा।

हर सुबह है एक कहानी,
हर पल में सौ रंग भरे।
उठो, चलो, फिर जी लो जीवन,
उम्मीदों के दीप जले।


    द्वारा Suvayan Dey
    Shared11 Apr 2025
    Start11 Apr 2025
    End11 Apr 2030
    इस पर लोग क्या कह रहे हैं