रासा छंद आधारित रचना
रासा छंद आधारित रचना

रासा छंद आधारित रचना!

शीर्षक : वीरा!

धरती-अम्बर को अब जोड़ो।
आशाओं के  गुल्लक  फोड़ो।।
बजने   दो   आँगन    शहनाई।
रंग   बदलती  ऋतु   है   छाई।।

अकड़-अकड़ कर चल तू वीरा।
कोयल   बोले   आ  रणधीरा ।।
बस्ती-ढाणी  का  बहु  प्यारा ।
मात भवानी   लाल    दुलारा ।।

छप्पन   इंची    छाती    चौड़ी।
दुश्मन  सेना   डर  कर   दौड़ी।।
छुप-छुप  कायर  दागे  गोली।
वीर    सिपाही    खेले    होली।।

बन  दुर्गा   काली  माँ  आ   जा।
दुश्मन  मिट्टी   में    दफना  जा।।
मानवता का  बिगुल  बजा   दें।
जग में सुरभित कुसुम सजा दें।।

स्वरचित तथा मौलिक,
कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई।
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