भगवान महावीर का जन्मकल्याणक
भगवान महावीर का जन्मकल्याणक
भगवान महावीर जन्मकल्याणक जैन धर्म के सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है। यह पर्व भगवान महावीर स्वामी के जन्म के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जो जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर थे। वर्ष 2025 में यह जन्मकल्याणक 10 अप्रैल को मनाया जाएगा, जो चैत्र शुक्ल त्रयोदशीतिथि को आता है।


भगवान महावीर का जन्म ईसा पूर्व 599 में कुंडलपुर (वर्तमान बिहार के वैशाली जिले में) हुआ था। उनके माता-पिता राजा सिद्धार्थ और रानी त्रिशला थे। ऐसा माना जाता है कि उनके जन्म के समय 14 (कुछ ग्रंथों में 16) शुभ स्वप्न रानी त्रिशला ने देखे थे, जो उनके तीर्थंकर होने का संकेत थे। उनके जन्म के साथ ही वातावरण में सुख-शांति फैल गई थी — इसीलिए इसे ‘जन्मकल्याणक’ कहा जाता है, न कि केवल ‘जयंती’।

🕊️ महावीर स्वामी के सिद्धांत

भगवान महावीर ने अपने जीवन में जो उपदेश दिए, वे आज भी पूरे मानव समाज के लिए मार्गदर्शक हैं। उनके पंच महाव्रत इस प्रकार हैं:

  • अहिंसा (हिंसा न करना)

  • सत्य (सच्चाई बोलना)

  • अस्तेय (चोरी न करना)

  • ब्रह्मचर्य (इंद्रिय संयम)

अपरिग्रह (संपत्ति में आसक्ति न रखना)

 जन्मकल्याणक की परंपराएं

  • जैन मंदिरों में भगवान का अभिषेक (जल व पंचामृत से स्नान) किया जाता है।

  • शोभायात्राएं निकाली जाती हैं जिसमें रथ पर भगवान की मूर्ति विराजमान होती है।

  • पाठ, प्रवचन, भजन, और ध्यान का आयोजन किया जाता है।

  • दान, तप, संयम और सेवा कार्य इस दिन विशेष रूप से किए जाते हैं।

  • कई श्रद्धालु अहिंसक भोजन, उपवास और स्वाध्याय करते हैl


    द्वारा ShadbKusum Admin
    Shared10 Apr 2025
    Start09 Apr 2025
    End09 Apr 2030
    इस पर लोग क्या कह रहे हैं