13457614576modify सावन मन भावन..सावन मन भावन...सावन यह मन भावन पावन, तन मन सहज भिगोता है। बरसे अंबर से जब पानी, कृषक खेत को जोता है।१। रिमझिम रिमझिम कभी जोर से, सलिल धरा पे झरता है। गरजते काले मेघ गगन में शोर बहुत वो करता है।२। खुश होते है लोग बाग सब, मौज मस्ती छा जाती है। झूले डल जाते आंगन में, बहन बेटियां आती है।३। बहते जल धारे नदियों में, मंगल मंगल होता है। फसलें सब उगने लगती है, जो जो किस्में बोता है।४। मूंग अरहर मोठ बाजरा, बोये अक्सर जाते है।। विशाल देश के भू भाग वो, हरे हो लहलहाते है।५।स्वरचित:अशोक दोशीLabelDirected by द्वारा अशोक दोषीShared24 Jun 2025Start24 Jun 2025End24 Jun 2030 The Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैंटिप्पणी लिखेंShadbKusum Admin25-Jun-2025CommentLike बहुत विस्तृत कल्पना. बहुत पसंद आया कुसुम सुराणा01-Jul-2025CommentLikeसुन्दर मनभावन रचना!Norman Sales18-Feb-2026CommentLikeबहुत बढियाँ सावन मन भावन..© टिप्पणी400 characters remainingजमा करेंरद्द करें