समय!
समय!


'चरैवेति....चरैवेति' चेतन धर्म समय का शाश्वत है!
सत्कर्म कर जी ले मनुज! यमराज सदा आश्वस्त है!

कौन जाने समय-कोख में छुपे पत्थर या हीरे-मोती?
विधाता भी कब पहचान पाएं समय की गति-मति?

मनुज! तू समय का यात्री..डोर तेरी उसके हाथ...
कठपुतली तू रंगमंच की, कर्म कर, समय है साथ!

समय हैं अनमोल मानव, समय का कर सदा मोल,
बीता कल-पल फिर नहीं आता, व्यय कर तोलमोल!

समय की चोट गिरा दे मनुज को अर्श से फर्श पर,
अहं में डूबा महाज्ञानी, पहुंचा इसी निष्कर्ष पर! 

समय न देखे भूतकाल में, न करें चिंता कल की!
आज प्रभुत्व समय का, वर्तमान सच्चाई पल की!

समय की शक्ति निराली, समय हैं जीवन का माली,
इति जीवन की खुशहाली, समय-गुल्लक हो खाली!

नेकी कर, गुल्लक में डाल, बुरा वक़्त पलटेगा अभी,
वक़्त नेमत खुदा की, वक़्त-वक़्त पर जानोगे सभी!

स्वरचित तथा मौलिक,
कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई, महाराष्ट्र  

इस पर लोग क्या कह रहे हैं