गीत : अजातशत्रु अटल बिहारी!
राजनीति के दलदल में खिलखिलाया कमल प्यारा,
अजातशत्रु अटल बिहारी कर्मयोगी विमल न्यारा!
कतरा-कतरा गर्म लहूँ में देशप्रेम था घुला-घुला!
संसद का जर्रा-जर्रा ओजस्वी स्वर से तुला-तुला!
कवि ह्रदय, प्रखर वक्ता, राष्ट्र समर्पित जीवन सारा!
हिंदुत्व पर होता गर्वान्वित निडर, निर्भय नेता न्यारा!
जननी जन्मभूमि लाल, लोकतंत्र का सजग प्रहरी,
कड़ी तपस्या से गौरवान्वित भारत रत्न से हिमगिरी!
इमरजेंसी के पापों का हिम्मत से लिया लेखा-जोखा!
गठबंधन की सरकार बना जनता को दिया मौका!
पोखरण में " बुद्ध मुस्काएँ" देश बना परमाणु शक्ति,
महाशक्तियों के प्रतिबन्ध पर भारी पड़ी अटल-युक्ति!
छल में माहिर पडोसी को दिया सुधरने का मौका,
कारगिल में सेना ने धोया घुसपैठियों को मार चौका!
माँ भारती के लाल ने गढ़े जग में नित्य नए प्रतिमान,
निज आचार-विचार से बढ़ाया मातृभूमि का सम्मान!
आजीवन ब्रह्मचारी, स्वयंसेवक ने लिखी राष्ट्रगाथा!
वन्दे मातरम् कह चिरप्रयाण को चले कर उन्नत माथा!
स्वरचित तथा मौलिक,
कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई, महाराष्ट्र|