33616236162modify चौकलेट जीवन उतार-चढ़ाव में न हो कभी खटास,काजु-किसमिस-चौकलेट की हो मिठास!रिश्ते पे न हो कभी छल-कपट का मुल्लमा,स्फटिक सा मन, विश्वास-समर्पण हो बलमा!स्वरचित तथा मौलिक,कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई LabelDirected by द्वारा कुसुम सुराणाShared10 Feb 2025Start10 Feb 2025End10 Feb 2030 The Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैंटिप्पणी लिखेंTanu Jain24-Apr-2025CommentLikeबहुत खूब Sheetal Jain26-Jul-2025CommentLikeबहुत सुन्दर कविता लिखी है। मैं आपकी लेखनी की सराहना करता हूँ।Jain Mikhil08-May-2026CommentLikeआप चमकते रहें और बढ़ते रहेंचौकलेट © टिप्पणी400 characters remainingजमा करेंरद्द करें