चौकलेट
चौकलेट
जीवन उतार-चढ़ाव में न हो कभी खटास,
काजु-किसमिस-चौकलेट की हो मिठास!
रिश्ते पे न हो कभी छल-कपट का मुल्लमा,
स्फटिक सा मन, विश्वास-समर्पण हो बलमा!

स्वरचित तथा मौलिक,
कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई 


इस पर लोग क्या कह रहे हैं
  • बहुत खूब
  • बहुत सुन्दर कविता लिखी है। मैं आपकी लेखनी की सराहना करता हूँ।
  • आप चमकते रहें और बढ़ते रहें