11104711047modify पावन पुत्र!पवन पुत्र हनुमान दुलारे।राम नाम ले जनम सुधारे।अष्ट चिरंजीवी बलशाली।लंगूर वदन उभरी लाली।।भक्ति भाव से रघुवर पूजे।ह्रदय पटल पर क्यों हो दूजे।शक्ति-भक्ति का अनुपम संगम।प्राणों से प्रिय थाती जंगम।आत्म मुग्धता से है दूरी।खल संहारक ताकत पूरी।जलधि लाँघ माँ सिय को खोजे।स्वामी सेवक बल बहु ओजे।।अहंकार बिन नम्र बहुत है ।मन में निर्णय बल अदभुत है।स्वयं चित्त में धारण करता।कभी नहीं वह डिंगे भरता।।कर्म समर्पण धर्म-धरोहर।निष्ठा अदभुत विरल मनोहर।विपदा टाले अरिदल पेले।जन्म-मरण का फेरा ठेले।।राम-लखन-सिय सब को भाए।पुत्र अंजनी सब गुण गाए।तनय केसरी पीड़ा हरता।हनुमत अदभुत कारज करता।।रुद्रावतार तारणहारा ।सत्य मार्ग का राही न्यारा।शक्ति पुंज है शिव का प्यारा।प्रज्ञा-बल का हो जयकारा।।स्वरचित तथा मौलिक,कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई।LabelDirected by द्वारा कुसुम सुराणाShared13 Apr 2026Start12 Apr 2026End12 Apr 2027 The Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैंटिप्पणी लिखेंBhavesh Jain18-Jun-2026CommentLikeबहुत सुन्दर रचनापावन पुत्र!© टिप्पणी400 characters remainingजमा करेंरद्द करें