देखो आलम
देखो आलम

बेफिकरी का आलम तो देखो,
देखकर भी अजनबी से निकल गये।
अनहद प्यार की ऋतु हुई रुसवा,
बगिया में शूल ही शूल उग आये।।

चंचल जैन

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