क्या मानसिक शांति धन से प्राप्त हो सकती है?
क्या मानसिक शांति धन से प्राप्त हो सकती है?
#विषय  क्या मानसिक शांति धन से प्राप्त की जा सकती है?
विधा आलेख
दिनांक 29/04/2025

मेरा ख्याल है कि धन एक ऐसी चीज है जो आपकी बुनायादी आवश्यकताओं की पूर्ती करता है , और इसके अभाव में दुःख या ग्लानी तो प्राय: प्रायः हर किसी को रहती ही रहती है ।
मेरे कहने का मतलब अन्य स्त्रोतों के साथ धन भी मानसिक शांति के लिए एक  महत्वपूर्ण स्त्रोत है । पर इसके लिए बोधिकता चाहिए, प्रबुद्धता व संबुद्धता चाहिए।

आवश्यकतानुसार निश्चित मात्रा में या पर्याप्त धन प्राप्त करने के बाद , एक संतोष धन भी रहना चाहिए, ताकि आपको कमाये पैसे का सुख व संतोष देने में वो  सक्षम हो । 
दूसरी एक बात धन कमाने के बाद उसका आनंद भी लेने आना चाहिए, धन का सद्वयय, सत्कर्म में विनियोग करना आना चाहिए।

अच्छे रहन सहन, सुविधा युक्त जीवन मन को आनंद तो देता ही है । 
पर प्रायः कितने लोग ऐसे रहते हैं कि उनको कभी संतोष रहता ही नहीं है, कितना भी धन रहने के बाद वे उदास रहते हैं ।

अब रही बात धन की आवश्यकता का स्तर मतलब उसका क्या पैमाना रहना चाहिए,
धन कितना रहना चाहिए, यह हर किसी का व्यक्तिगत मामला है , स्वभाव का मामला है साथ ही, आपकी महत्वाकांक्षा व मनोवृत्ति का मामला है । आपने खर्चें के कैसे दायित्व खड़े किये उस पर भी यह मामला निर्भर करता है ।

 जैसे एक शादी लाखों में भी हो सकती है और खर्च करो तो पांच करोड़ भी कम पड़े,आपने अपनी कैसी छवि बनायी है उस हिसाब से लोगों की व आपके  मन की दोनों तरफ से अपेक्षाएं भी बढ़ जाती है । 

आप  दो मेंसे किसी की अपेक्षा पर खरे न उतरे तो यह आपको  अच्छा महसूस नहीं होने देगा। 

क्या कहेंगे  लोग का रोग लगभग सभी को रहता ही रहता है, यह रोग आपका अन्दर ही अन्दर कितना फैला उस पर मनोशांति तय होगी ।

बात मन की शांति की है तो इसके लिए हर कोई इतना भाग्यशाली नहीं रहता की उसे हर हाल में खुश रहना आता हो । 
बहुत कम लोग ऐसे रहते  हैं जो लोक लाज नहीं रखते । 

 समाज परिवार आपसे संबंधित लोग आपका किसके साथ किन प्रकृति के लोगों के साथ उठना बैठना है वे भी  मन की शांति अशांति के लिए सहायक या असहायक रह सकते हैं ।
जैसे पूरा ग्रुप पैसादार है और घुमने फिरने व देश-विदेश के टूर ट्रिप की बात करने वाले हो, स्वछंद हो सक्षम हो उनके साथ सतत बैठना पड़े तो एक सीधे सादे आदमी के मन में तनाव पैदा करेगा, या मन को दुःखी कर सकता है , यह संभावना है , तो कहा भी है कि दोस्ती बराबरी वालों से करो या समझदारों से करो जो  जमीन से जुड़ा हो । या स्वयं समझदार बनों ताकि किस बात के प्रभाव में आना है या किस बात से प्रभावित नहीं होना उसका निर्णय लेने को आना चाहिए।
।।।

स्वयं के स्वभाव के साथ समाज व संबंधित लोगों से मन की शांति बहुत प्रभावित होती है । 
वैसे धन की महत्वाकांक्षा  आपको आर्थिक रूप से आगे बढ़ाने में मदद करती है , वहीं धन कमाने की प्रतिस्पर्धा उसमें  भी द्वेष की भावना से प्रेरित हो तो वो आपको कभी चैन की नींद सोने नहीं देगी । 

वैसे आपकी मानसिक शांति आपकी इच्छाओं पर है , वो आपने कितनी व कैसी इच्छाएं पाल रखी है, आप उसे पूरी करने में सफल है या असफल उस पर मानसिक शांति  अशांति प्राप्त होती है । 

अब हर कोई फक्कड़ या साधू तो नहीं बन सकता ,एक घर संसारी  सामाजिक व्यक्ति के लिए त्यागी वैरागी बनना मुश्किल होता है , 
हाॅं मुश्किल तो होता ही है पर नामुमकिन भी नहीं।

 हमें अपनी आवश्यकताओं को कम कर के ही सुख शांति से जीया जा सकता है, हमें अपने मन को समझाना बुझाना व बहलाने आना चाहिए, हमारी विकृत मनोवृत्तियों को संयमित करने आना चाहिए। सादा जीवन व उच्च विचार से मन के दोषों को दूर कर शांति से जीया जा सकता है ।
हमें समझना पड़ता है कि हम भले लाखों से कम है , पर करोड़ों लोगों से अच्छे हैं , इस तरह मन को सीखाने समझाने की आवश्यकता है, उसके लिए भी होशियारी चाहिए।

मैं मानता हूॅं , आज शहरी हो या ग्रामिण जीवन 
कदम कदम पर धन की आवश्यकता पड़ती है,
इसलिए हमें पुरुषार्थ, व बल से काम कर पैसे की बचत करना आना चाहिए, इतना पैसा कम से कम, जो सुगमता से आपका जीवन  निर्वहन कर सके, समाज के साथ इज्जत से उठ बैठ सके।
आलेख :अशोक दोशी 


इस पर लोग क्या कह रहे हैं