2212322123modify संक्रांति, पोंगल, बिहु, लोहड़ी की लख लख बधाइयाँ!"खुशियों का त्यौहार है आया।घर-घर आनन्द-उल्हास लाया।।सपनों को दिया सच का औरा।खेत खलिहान गएं यौवन से बौरा।।"कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई।LabelDirected by द्वारा कुसुम सुराणाShared14 Jan 2026Start14 Jan 2026End14 Jan 2031 The Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैंटिप्पणी लिखेंसंक्रांति, पोंगल, बिहु, लोहड़ी की लख लख बधाइयाँ!© टिप्पणी400 characters remainingजमा करेंरद्द करें