27537225372modify हमराहीहमराहीसुख-दुख आये जाये, साथी साथ निभाना।विपदा में हमराही, संबल बनकर आना।।रंग बदलते रिश्तें, अपने बनते स्वार्थी~महती जब हो पैसा, पूजे देख जमाना।। स्वरचित मौलिक रचना चंचल जैनमुंबई, महाराष्ट्रLabelDirected by द्वारा चंचल जैनShared17 Apr 2025Start17 Apr 2025End17 Apr 2030 The Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैंटिप्पणी लिखेंकुसुम सुराणा18-Apr-2025CommentLikeवाह! बहुत खूब!Sundeep Jain30-Apr-2025CommentLikeबहुत खूब Saanvi Jain06-Jun-2025CommentLikeआप चमकते रहें और बढ़ते रहेंIntranet Demo15-Jun-2025CommentLikeमनमोहक शब्दों से बयाँ करते सुन्दर ! बधाईIntranet Demo05-Sep-2025CommentLikeवाह वाह! बहुत खूब! सुन्दर प्रस्तुति!Intranetuser Demo22-Apr-2026CommentLikeबहुत खूब!Creativeinfo Demo19-Jun-2026CommentLikeमस्त हमराही© टिप्पणी400 characters remainingजमा करेंरद्द करें