शीर्षक : नवरात्रि में मैया सुधारों मातृभूमि का हाल....
छुम-छुम छुम-छुम करती मैया, आओ बनकर ढ़ाल,
नवरात्रि में मैया सुधारों, मातृभूमि का हाल!
सहस्त्र किरणों से सजा अम्बर का स्वर्णिम थाल!
अरुणिमा से सुशोभित मैया का रक्तिम भाल!
कैलाशपति की प्रियंवदा, महागौरी करो निहाल!
पञ्चारति ले करें आरती उत्तुंग हिमालय पर्वत माल!
रूण झुण रूण झुण करती मैया पधारो मेरे द्वार,
नवरात्रि में दरबार सजा लो, करों भारत भू का उद्धार!
धवल वस्त्र-धारिणी, निर्मल गंगा की धार,
लाल लाल चुन्दड, गले में ग्रह-नक्षत्रों के हार!
रत्न-जड़ित कर्णफुल, कर नर-मुंड श्रृंगार!
प्रकटो अष्टभुजाधारिणी, ले त्रिशूल, खड़ग, तलवार!
अमृत कलश उंड़ेलो धरा पर, बरसाओ अमिरस धार,
कालरात्रि में माँ दुर्गा, करों भारत भूमि पर उपकार!
ब्रह्मस्वरूपा, योगिणी, मानिनी, कल्याणी धीर-गंभीर!
हिन्द महासागर करे पद-प्रक्षालन, होय अधीर!
विद्या, विवेक,विनय, वाणी, व्यवहार, विचार,
माँ भगवती! जगत जननी, हरो दुःख, दारिद्र, दुराचार!
जगमग जगमग चमके, तीन लोक में मैया का दरबार,
कालरात्रि में मैया रोको, स्त्री-भ्रूण हत्या-संहार!
दशो-दिशाओं में गूंजे माँ तेरा नाद-झंकार,
तेरी कृपादृष्टी से फले-फुले जगत, सारा संसार!
रिद्धि-सिद्धि वरदे! भर दो धन-धान्य-भंडार!
भवसागर से पार लगा दो मैया, नैया है मंझधार!
खल-असुर-संहार, करो मानव धर्म-रक्षा!
उठा शस्त्र कर-कमलों में, करो सृष्टी-रक्षा!
महिषासुरमर्दिनी दे दो शस्त्र-शास्त्र दीक्षा
सिंह आरोहिणी माँ भवानी, सम्पन्न करो प्रतीक्षा!
रुम झुम रुम झुम बाजे पायलियाँ, खोले कारागार द्वार,
तोड़ मुखौटे भ्रष्टाचारियों दुराचारियों के करे खल-संहार !