सफर अकेला पर मैं टूटी नहीं
सफर अकेला पर मैं टूटी नहीं

“ज़िंदगी इतनी मुश्किल होगी, कभी सोचा ना था,
किसी ने हाथ थामा… और कितनों ने बीच राह छोड़ा, ये भी सोचा ना था।
सोचा था साथ हमेशा रहेगा,
पर ये वक़्त भी बदल जाएगा, ये भी सोचा ना था।
रात है तो क्या हुआ, सुबह तो होगी ही,
पर हर सुबह में वही लोग साथ होंगे… ये ज़रूरी नहीं था।”


द्वारा दिया जयसिंघानी 


    द्वारा Diya Jaisinghani
    Shared19 Feb 2026
    Start18 Feb 2026
    End18 Feb 2031
    इस पर लोग क्या कह रहे हैं