शिक्षक दिवस विशेष साहित्यिक प्रतियोगिता
शिक्षक दिवस विशेष साहित्यिक प्रतियोगिता

ज्ञान के दीप जलाकर, वो अंधियारा मिटाते हैं,
भविष्य की राहों को, वो ही तो दिखाते हैं।
संस्कारों की नींव पर, सपनों का भवन बनाते हैं,
शिक्षक ही हैं, जो मानव को इंसान बनाते हैं।

कलम से लिखते जो इतिहास, विचारों में जिनके नव चेतना,
हर बालक के हृदय में भरते, कर्मठता की प्रेरणा।
राष्ट्र की प्रगति का मूल, शिक्षा से ही होता है,
शिक्षक की तपस्या से ही, भारत महान होता है।

पढ़ाकर केवल किताबें, कर्तव्य नहीं निभाते हैं,
जीवन का पाठ पढ़ाकर, दिशा हमें दिखलाते है।
सत्य, अहिंसा, परिश्रम का बीज वे बो जाते हैं,
अपने आचरण से ही, आदर्श हमें सिखाते हैं।

चाहे नेता, या वैज्ञानिक, या कोई योद्धा महान है,
शिक्षक की छाया में पाता जीवन का वरदान है।
शिक्षक ही है राष्ट्र की रीढ़, शिक्षक ही सम्मान है
उनके बिना अधूरा है, अपने भारत का उत्थान है।


    द्वारा Yogesh Awasthi
    Shared28 Aug 2025
    Start28 Aug 2025
    End28 Aug 2030
    इस पर लोग क्या कह रहे हैं