28942894modify समरांगण...Play Audioपुष्पमाला छंद मापनी २१ २२२ १२दिनांक : 24-04-2026शीर्षक : समरांगणविश्व समरांगण सजा।शंख रण में है बजा।शस्त्र हाटों पर बिके।ओस पलकों पर टिके।।आह मनु की जग सुने।चाह मखमल की बुने।ताप से दिल है जला।सूर्य अस्ताचल ढला।।युद्ध को मनु रोक दो।आग में मत झोक दो।देख मत बन खुद खुदा।न्याय रब का है जुदा।।स्वरचित तथा मौलिक,कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई।LabelDirected by द्वारा कुसुम सुराणाShared25 Apr 2026Start25 Apr 2026End25 Apr 2027Your browser does not support the audio element. The Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैंटिप्पणी लिखेंसमरांगण...© टिप्पणी400 characters remainingजमा करेंरद्द करें